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प्राचार्य

आज के बदलते शैक्षिक परिवेश में शिक्षक-अभिभावक, विद्यार्थी तीनो ही शैक्षणिक सफलता के लिए संघर्षरत हैं| आज की शिक्षा बाल केन्द्रित हैं | बच्चो में दबे संस्कारो के विकास के लिए अनुकूल वातावरण की आवश्यकता हैं | बालक का सर्वागीण विकास वर्तमान शिक्षा का मुख्य उद्देश्य हैं | इसके लिए हम सबको अपने अपने दायित्वों का निर्वाह करना चाहिए | हमारी सबसे महत्वपूर्ण कोशिश विद्यारथियो को एक ऐसी शिक्षा प्रदान करना हैं जो उन्हें अपने कौशल व सपनो को पहचानने में मददगार हो तथा उनके उत्साह को बढाने में मील का पत्थर साबित हो |
वांछित परिणाम प्राप्ति हेतु शिक्षक की अहम् भूमिका और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक हैं |